एकांगी रहने वाला चैतन्य ही ‘मैं’ हूं

‘मैं’ की तलाश हर व्यक्ति को रहती है। इस ‘मैं’ को समझना ही सबसे कठिन है। इसका कोई मूर्त रूप नहीं है लेकिन अज्ञान के प्रभाव से मनुष्य स्थूल शरीर को ही ‘मैं’ मानकर अहंकार के अंधकार में भटकता रहता है, जबक

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एकांगी रहने वाला चैतन्य ही ‘मैं’ हूं एकांगी रहने वाला चैतन्य ही ‘मैं’ हूं Reviewed by Group Hindi News on July 19, 2023 Rating: 5

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